(स्कूल को शाला और पाठशाला भी बोला जाता है)
हुआ सवेरा शाला जा
सूरज ने आँखें खोलीं
चीं चीं चीं चिड़िया बोलीं
कुकड़ूं कूं मुर्गा बोला
मंदिर में घंटा बोला ।
क्वेक क्वेक बत्तखें बोलीं
एक-दूजे के संग हो लीं
मेंढक टर्रम टूं बोला
जाग गया घर में भोला ।
घड़ी बोलती टिक टिक टिक
राजा बाबू बन कर दिख
अब उठ जल्दी शाला जा
पढ़ लिख कर घर वापस आ।
🌻
नीलम राकेश
(केशव नगर कालोनी, लखनऊ, उत्तर-प्रदेश
neelamrakeshchandra@gmail.com)