बिजली






बिजली

डॉ ० दलजीत कौर

चंडीगढ़ 


तड़-तड़ की हुई आवाज़

चूज़ा भागा माँ के पास

बिजली चमकी हुआ प्रकाश

बरखा की जगी इक आस

हवा चली और आँधी आई

छिप गए बिल में चूहे भाई

जाने किसने टार्च जलाई

इतनी चमक कहाँ से आई

इतना शोर किसने मचाया

किसने सबको इतना डराया

बंदर ने समझाई बात

है ईश्वर की यह करामात

जब भी बादल हैं गरजते

बिजली को पैदा वे करते